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Archive for नोव्हेंबर 17, 2010

श्र्लोक

ॐ 
ॐ भूर्भव स्व: ॐ तस्त्यवितुर्वरेण्यं   भर्गोदेवस्य धीमही |
धियो योन:  प्रचोदयात:


एकदंताय   विघ्महे   वक्रतुण्डाय     धीमहि |
तन्नो   दंति:  प्रचोदयात   ||
 
ॐ 
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटी समप्रभ:|
निर्विग्न्म  कुरुमेदेव सर्व कार्येषु सर्वदा: ।।
 
ॐ 
जयाच्या जनि जन्म नामार्थ झाला |
जयाने सदा वास नमात   केला ||
जयाच्या मुखी सर्वदा नामकिर्ति|
नमस्कार त्या ब्रह्म  चैतन्यमूर्ती ||
 

पुंडलिक वरदा हरी विठ्ठल  |
 

गुरु ब्रह्मा गुरु विंष्णु गुरुदेवो महेश्र्वरा   |
गुरु साक्षात परब्रह्म  तस्मै श्री गुरवे नम:  ||

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