आपले स्वागत आहे!

श्रीविष्णुसहस्त्रनामस्तोत्रम्

ईशान: प्राणद: प्राणो ज्येष्ठ: प्रजापति: |
हिरण्यगर्भो भूगर्भो माधवो मधुसूदन: ||२१||

ईश्वरो विक्रमी धन्वी मेधावी विक्रम: क्रम: |
अनुत्तमो दुराधर्ष: कृतज्ञ: कृतिरात्मवान् ||२२||

सुरेश: शरणं शर्म विश्वरेता: प्रजाभव:
अह: संवत्सरो व्याल: प्रत्यय: सर्वदर्शन: ||२३||

अज: सर्वेश्वर: सिध्द: सिध्दि: सर्वादिरच्युत: |
वृषाकपिरमेयात्मा सर्वयोगविनि: सृत: ||२४||

वसुर्वसुमना: सत्य: समात्मा सम्मित: सम: |
अमोघ: पुण्डरीकाक्षो वृषकर्मा वृषाकृति: ||२५||

रुद्रो बहुशिरा बभ्रुर्विश्वयोनि: शुचिश्रवा: |
अमृत: शाश्वत: स्थाणुर्वरारोहो महातपा: ||२६||

सर्वग: सर्वविभ्दानुर्विष्वक्सेनो जनार्दन: |
वेदो वेदविदव्य.ड्.गो वेदाड्.गो वेदवित्कवि: ||२७||

लोकाध्यक्ष: सुराध्यक्षो धर्माध्यक्ष: कृताकृत: |
चतुरात्मा चतुर्व्यूहश्चतुर्दंष्ट्रश्चतुर्भुज: ||२८||

भ्राजिष्णुर्भोजनं भोक्ता सहिष्णुर्जगदादिज: |
अनघो विजयो जेता विश्वयोनि: पुनर्वसु: ||२९||

उपेन्द्रो वामन: प्रांशुरमोघ: शुचिरूर्जित: |
अतिन्द्र: संग्रह: सर्गो द्रुतात्मा नियमो यम: ||३०||

प्रतिक्रिया व्यक्त करा

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदला )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  बदला )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदला )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदला )

Connecting to %s

%d bloggers like this: