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Archive for ऑक्टोबर 16, 2011

श्रीविष्णुसहस्त्रनामस्तोत्रम्

श्रीविष्णुसहस्त्रनामस्तोत्रम्

वृषाही वृषभो विष्णुर्वृशपर्वा वृषोदर: |
वर्धनो वर्धमानश्च विविक्त: श्रुतिसागर: ||४१||

सुभुजो दुर्धरो वाग्मी महेन्द्रो वसुदो वसु: |
नैकरूपो बृहद्रूप: शिपिविष्ट: प्रकाशन: ||४२||

ओजस्तेजोद्दुतिधर: प्रकाशात्मा प्रतापन: |
ऋध्द: स्पष्टाक्षरो मन्त्रश्चन्द्रांशुर्भास्करद्दुति: ||४३||

अमृतांषुभ्दवो भानु: शशबिन्दु: सुरेश्वर:|
औषधं जगतः सेतुः सत्यधर्मपराक्रमः ||४४||

भूतभव्यभवन्नाथ: पवन: पावनो S नल: |
कामहा कामकृत्कान्त: काम: कामप्रद: प्रभु: ||४५||

युगादिकृद्दुगावर्तो नैकमायो महाशन: |
अदृश्यो S व्यक्तरूपश्च सहस्त्रजिदानन्तजित् ||४६||

इष्टो स विशिष्ट: शिष्टेष्ट: शिख न्डी नहुषो वर्ष:|
क्रोधहा क्रोधकृत्कर्ता विश्वबाहुर्महीधर : ||४७||

अच्युत: प्रथित: प्राण: प्राणदो वासवानुज:|
अपां निधिरधिष्ठानमप्रमत्त: प्रतिष्ठित: ||४८||

स्कन्द: स्कन्दधरो धुर्यो वरदो वायुवाहन: |
वासुदेवो बृहभ्दानुरादिदेव: पुरन्दर: ||४९||

अशोकस्तारणस्तार: शूर: शौरर्जनेश्वर: |
अनुकूल: शतावर्त: पद्मी पद्मनिभेक्षण: ||५०||

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