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श्रीविष्णुसहस्त्रनामस्तोत्रम्

पद्मनाभो S रविन्दाक्ष: पद्मगर्भ: शरीरभृत् |
महर्ध्दिर्रूध्दो वृध्दात्मा महाक्षो गरुडध्वज: ||५१||

अतुल: शरभो भीम: समयज्ञो हरिर्हरि: |
सर्वलक्षणलक्षण्यो लक्ष्मिवान्समितिउजय: ||५२||

विक्षरो रोहितो मार्गो हेतुर्दामोदर: सह: |
महिदरो महाभागो वेगवानमिताशन: ||५३||

उध्दव: क्षोभणो देव: श्रीगर्भ: परमेश्वर: |
करणं कारणं कर्ता विकर्ता गहनो गुह: ||५४||

व्यवसायो व्यवस्थान: संस्थान: स्थानदो ध्रुव: |
परर्ध्दि: परमस्पष्टस्तुष्ट: पुष्ट: शुभेक्षण: ||५५||

रामो विरामो विराजो मार्गो नेयो नयो स नय: |
वीर: शक्तिमतां श्रेष्ठो धर्मो धर्मविदुत्तम: ||५६||

वैकु ण् ठ: पुरुष: प्राण: प्राणद: प्रणव: पृथु: |
हिरण्यगर्भ: शत्रुघ्नो व्याप्तो वायुरधोक्षज: ||५७||

ऋतु: सुदर्शन: काल: परमेष्ठी परिग्रह |
उग्र: संवत्सरो दक्षो विश्रामो विश्वदक्षिण: ||५८||

विस्तार: स्थावरस्थाणु: प्रमाणं बीजमव्ययम् |
अर्थो S नर्थो महाकोशो महाभोगो महाधन: ||५९||

अनिर्वि ण्न: स्थविष्ठो S भुर्धर्मयूपो महामख: |
नक्षत्रनेमिर्नक्षत्री क्षम: क्षाम: समीहन: ||६०||

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