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श्रीविष्णुसहस्त्रनामस्तोत्रम्

यज्ञ इज्यो महेज्यश्च क्रतु: सत्रं सतां गति: |
सर्वदर्शी विमुक्तात्मा सर्वज्ञो ज्ञानमुत्तमम् ||६१||

सुव्रत: सुमुख: सूक्ष्म: सुघोष: सुखद: सुह्रत् |
मनोहरो जितक्रोधो विरबाहुरर्विदारण : ||६२||

स्वापन: स्ववशो व्यापी नैकात्मा नैककर्मकृत् |
वत्सरो वत्सलो वत्सी रत्नगर्भो धनेश्वर: ||६३||

धर्मगुब्धर्मकृध्दरमी सदत्क्षरमक्षरम् |
अविज्ञाता सहस्त्रांशुर्विधाता कृतलक्षण: ||६४||

गभस्तिनेमि: सत्त्वस्थ: सिंहो भूतमहेश्वर: |
आदिदेवो महादेवो देवेशो देवभृदगुरु: ||६५||

उत्तरो गोपतिर्गोप्ता ज्ञानगम्य: पुरातन: |
शरीरभूतभृभ्दोक्ता कपीन्द्रो भूरिदक्षिण: ||६६||

सोमपो S मृतप: सोम: पुरुजित्पुरुसत्तम: |
विनयो जय: सत्यसंधो दाशार्ह: सात्वतां पति: ||६७||

जीवो विनयिता साक्षी मुकुन्दो S मितविक्रम: |
अम्भोनिधिरणन्तात्मा महोदधिषयो S न्तक: ||६८||

अजो महार्ह: स्वाभाव्यो जितामित्र: प्रमोदन: |
आनन्दो नन्दनो नन्द: सत्यधर्मा त्रिविक्रम ||६९||

महर्षि: कपिलाचार्य: कृतज्ञो मेदिनीपति: |
त्रिपदस्त्रिदशाध्दक्षो महाशृडग.: कृतान्तकृत् ||७०||

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