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Archive for ऑक्टोबर 19, 2011

श्रीविष्णुसहस्त्रनामस्तोत्रम्

श्रीविष्णुसहस्त्रनामस्तोत्रम्

अर्चिष्मानर्चित: कुम्भो विशुध्दात्मा विशोधन: |
अनोरुध्दो S प्रितिरथ: प्रद्दुम्नो S मितविक्रम: ||८१||

कालनिमिनिहा वीर: शौरि: शूरजनेश्वर: |
त्रिकात्मा त्रिलोकेश: केशव: केशिहा हरि: ||८२||

कामदेव: कामपाल: कामी कान्त: कृतागम: |
अनिर्देश्यवपुश्नुर्विरो S नन्तो धन ञजय : ||८३||

ब्रह्मण्यो ब्रह्मक्रुद्ब्रह्मा ब्रह्म ब्रह्मविवर्धन: |
ब्रह्मविदब्राह्मणो ब्रह्मी ब्रह्मज्ञो ब्राह्मणप्रिय: ||८४||

महाक्रमो महाकर्मा महातेजा महोरग: |
महाक्रतुर्महायज्वा महायज्ञो महाहवि: ||८५||

स्तव्य: स्तवप्रिय: स्तोत्रं स्तुति: स्तोता रणप्रिय: |
पूर्ण: पूरयिता पुण्य: पुण्यकीर्तिरनामय: ||८६||

मनोजवस्तीकरो वसुरेता वसुप्रद: |
वसुप्रदो वासुदेवो वसुर्वसुमना हवि: ||८७||

सद्गति: सत्कृति: सत्ता सद् भूति: सत्परायण: |
शूरसेना यदुश्रेष्ठ: सन्निवास: सयामुन: ||८८||

भूतावासो वासुदेव: सर्वासुनिलयो S नल: |
दर्पहा दर्पदो दृप्तो दुर्धरो S थापराजित: ||८९||

विश्वमिर्तिर्महामुर्तिर्दिप्तमुर्तिरमुर्तिमान् |
अनेकमुर्तिरव्यक्त: शतमूर्ति: शतानन : ||९०||

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