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Archive for ऑक्टोबर 22, 2011

श्रीविष्णुसहस्त्रनामस्तोत्रम्

श्रीविष्णुसहस्त्रनामस्तोत्रम्

सुलभा: सुव्रत: सिध्द:शत्रुजिच्छत्रु तापन: |
न्यग्रोधोदुम्बरो S श्वत्थश्चाणूरान्ध्रनिषूदन: ||१०१||

सहस्त्रार्चि: सप्तजिह्र: सप्तैधा: सप्त्स्वाहन: |
अमुर्तिरनघो S चिन्त्यो भयकृभ्दयनाशन: ||१०२||

अनुर्बृहत्कृश: स्थूलो गुणभृन्निर्गुणो महान् |
अधृत: स्वधृत: स्वास्य: प्राग्वंशो वंशवर्ध्दन: ||१०३||

भारभृत्कथितो योगी योगीश: सर्वकामद: |
आश्रम: श्रमण: क्षाम: सुपर्णो वायुवाहन: ||१०४||

धनुर्धरो धनुर्वेदो द ण्डो दमयिता दम: |
अपराजित: सर्वसहो नियन्ता नियमो यम: ||१०५||

सत्ववान्सात्विक: सत्य: सत्यधर्मपरायण: |
अभिप्राय: प्रियार्हो S र्ह: प्रियकृत्प्रीति वर्धन: ||१०६||

विहायसगतिर्जोति: सुरुचिर्हुतभुग्विभु : |
रविर्विरोचन: सूर्य: सविता रविलोचन: ||१०७||

अनन्तो हुतभुग्भोक्ता सुखदो नैकजो S ग्रज: |
अनिर्वि ण्ण: सदामर्षी लोकाधिष्ठानामद् भूत: ||१०८||

सनात्सनातनतम: कपिल: कपिरप्यय: |
स्वस्तिद: स्वस्तिकृ त्स्वस्तिस्वस्तिभू क्स्व स्तिदक्षिण: ||१०९||

अरौद्र: कु ण्डली चक्री विक्रम्युर्जितशासन: |
शब्दातित: शब्दसह: शिशिर: शर्वरीकर: ||११०||

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