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Archive for ऑगस्ट 13, 2012

श्रीज्ञानदेव-हरिपाठ

        ॐ
|| श्रीज्ञानदेव – हरिपाठ ||
चहुं वेदीं जाण षट्शास्त्रीं कारण |
अठराही पुराणें हरिसी गाती || १ ||
मंथुनि नवनीता तैसें घे अनंता |
वायां व्यर्थ कथा सांडी मार्ग || २ ||
एक हरि आत्मा जीव शिव समा |
वायां तूं दुर्गमा न घालीं मन || ३ ||
ज्ञानदेवा पाठ हरि हा वैकुंठ |
भरला घनदाट हरि दिसे || ४ || ध्रु O ||
त्रिगुण असार निर्गुण हें सार |
सारासार विचार हरिपाठ || १ ||
सगुण निर्गुण गुणाचें अगुण |
हरिवीण मन व्यर्थ जाय || २ ||
अव्यक्त निराकार नाहीं ज्या आकार |
जेथुन चराचर हरिसी भजे || ३ ||
ज्ञानदेवा ध्यानीं रामकृष्ण मनीं |
अनंत जन्मोनि पुण्य होय || ४ || ध्रु O ||

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