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Archive for फेब्रुवारी 11, 2016

॥ श्री गणपतिस्तोत्रं ॥

                                       ॐ

श्री गणपतिस्तोत्रं

श्री गणेशाय नाम:

नारद उवाच

प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम्

भत्त्कावासं स्मरेन्नित्यमायुकामार्थसिध्दये ॥१॥

प्रथमं वक्रतुंडं एकदंतं व्दितियकमं

तृतीयं कृष्णपिंगाक्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम् ॥२॥

लंबोदरं पंचमं षष्ठं विकटमेव

सप्तमं विघ्नराजेन्द्रं धूम्रवर्णं तथाष्टममं ॥३॥

नवमं भालचंद्रं दशमं तु विनायकमं

एकादशं गणपतिं व्दादशं तु गजाननमं ॥४॥

                 ॐ

व्दादशैतानि नामानि त्रिसंध्यं पठेन्नर:

विघ्नभयं तस्य सर्वसिध्दीकरं प्रभो ॥५॥

                     ॐ

विविद्दार्थी लभते विद्दां धनार्थी लभते धनम्

पुत्रार्थी लभते पुत्रान्मोक्षार्थि लभतेगतिमं ॥६॥

जपेद्गणपतिस्तोत्रं षड्र्भिमासैफलं लभेत्

संवत्सरेण सिध्दि लभते नात्र संशय॥७॥

अष्टभ्यो ब्राःमनेभयश्र्च लिखित्वा : समर्पयेत

तस्य वि द्द। भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादत:॥ ८ ॥

             ॥

ईति श्रीनारदपुराणे संकटनाशनं नाम

श्रीगणपति स्तोत्रं संपुर्णमं

माघ शुक्लपक्ष चतुर्थी

                                        ॐ

माघ शुक्लपक्ष चतुर्थी

गणेश जयंती  ! तिल कुंद चतुर्थी !

विनायक चतुर्थी

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